H-1B वीज़ा क्या है? जानिए पूरी प्रक्रिया और फायदे

अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले लाखों भारतीयों के लिए H-1B वीज़ा सबसे बड़ा जरिया, जानें पूरी प्रक्रिया और इसके फायदे

अमेरिका में H-1B वीज़ा: भारतीयों का सबसे बड़ा सपना

हर साल लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स का सपना होता है कि वे अमेरिका जाकर काम करें, अच्छी सैलरी पाएं और अपने करियर को नई ऊँचाइयों तक ले जाएं। खासकर इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, डेटा साइंटिस्ट और मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। लेकिन वहां काम करने के लिए सिर्फ डिग्री या अनुभव काफी नहीं है, बल्कि एक विशेष वीजा की ज़रूरत होती है जिसे H-1B वीज़ा कहा जाता है। यह वीज़ा खासतौर पर उन हाई-स्किल्ड वर्कर्स के लिए बनाया गया है जो आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और साइंस जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं।

H-1B वीज़ा फीस में बड़ा बदलाव

हाल ही में अमेरिकी सरकार ने इस वीज़ा की फीस में बड़ा इज़ाफा किया है। पहले जहां H-1B वीज़ा पर लगभग 5 लाख रुपये तक का खर्च आता था, वहीं अब नई फीस बढ़कर 88 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह बदलाव 21 सितंबर से लागू हो चुका है। इसका मतलब है कि अब H-1B वीज़ा लेना पहले से 50 गुना ज्यादा महंगा हो गया है। इस फैसले का असर सीधे तौर पर उन भारतीय युवाओं पर पड़ेगा जो अमेरिका में नौकरी पाने का सपना देखते हैं।

H-1B वीज़ा क्या है और कैसे मिलता है?

H-1B एक नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा है। यानी यह अमेरिका की नागरिकता नहीं देता, लेकिन वहां कुछ सालों तक काम करने की अनुमति ज़रूर देता है। इसकी वैधता 3 साल की होती है और इसे आगे 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है। हर साल लगभग 85,000 H-1B वीज़ा जारी किए जाते हैं, जिनमें 65,000 सामान्य कैटेगरी और 20,000 उच्च शिक्षा प्राप्त आवेदकों के लिए होते हैं।

इस वीज़ा को पाने के लिए अमेरिकी कंपनी का स्पॉन्सर होना ज़रूरी है। यानी कोई कंपनी आपके नाम से आवेदन करेगी। इसके साथ ही उम्मीदवार के पास खास तकनीकी या प्रोफेशनल स्किल होनी चाहिए। सभी आवेदनों में से कंप्यूटर आधारित लॉटरी सिस्टम के ज़रिए चयन होता है और फिर इंटरव्यू व प्रोसेसिंग के बाद वीज़ा जारी किया जाता है।

क्यों भारतीयों को सबसे ज़्यादा पसंद आता है H-1B वीज़ा?

हर साल H-1B वीज़ा पाने वालों में लगभग 70% भारतीय होते हैं। 2023 में करीब 1.91 लाख भारतीयों को यह वीज़ा मिला था, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 2.07 लाख तक पहुंच गई। इसका कारण है कि अमेरिका में टेक और मेडिकल सेक्टर में सैलरी भारत की तुलना में कई गुना अधिक होती है। इसके अलावा वहां प्रोफेशनल्स को बेहतर सुविधाएं, उच्च स्तर का जीवन और इंटरनेशनल एक्सपीरियंस मिलता है। यही वजह है कि भारतीयों को यह वीज़ा सबसे ज्यादा रास आता है। साथ ही, H-1B वीज़ा के जरिए बाद में स्थायी नागरिकता के लिए भी आवेदन किया जा सकता है, जो इसे और आकर्षक बनाता है।

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