इंडिगो कैंसिलेशन से हंगामा, संसद में हलचल; केंद्र की जांच जारी

इंडिगो संकट पर संसद से लेकर मंत्रालय तक हलचल, DGCA का नोटिस; रेलवे ने चलाईं 89 स्पेशल ट्रेनें

इंडिगो द्वारा बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द किए जाने और लगातार ऑपरेशनल गड़बड़ियों के बाद स्थिति अब सामान्य प्रशासनिक दायरे से आगे बढ़कर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर पहुंच गई है। हजारों यात्रियों की परेशानियों के बीच परिवहन, पर्यटन और नागरिक उड्डयन से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने इंडिगो, DGCA, अन्य एयरलाइंस और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के अधिकारियों को तलब करने का निर्णय लिया है।

इंडिगो के उड़ान संकट ने आम यात्रियों, सांसदों और उद्योग जगत में चिंता पैदा की है। कई सांसदों ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें भी फ्लाइट कैंसिलेशन की वजह से असुविधा का सामना करना पड़ा। यही वजह है कि समिति के अध्यक्ष एवं जेडीयू सांसद संजय कुमार झा इस मुद्दे पर विस्तृत समीक्षा करेंगे और सभी पक्षों से जवाबदेही तय करने से जुड़े सवाल पूछेंगे।

समिति यह भी जांच करेगी कि जब इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हो रही थीं तो एयरलाइंस ने अचानक किराए क्यों बढ़ा दिए। इससे यात्रियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ा, जो नियमों के खिलाफ माना जा रहा है।

इसी बीच CPM सांसद जॉन ब्रिटास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि संकट की गंभीरता को देखते हुए इस मामले की जांच JPC (संयुक्त संसदीय समिति) या न्यायिक आयोग से कराई जाए।

DGCA की सख्ती — इंडिगो के CEO को नोटिस

उड्डयन नियामक DGCA ने इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स और अकाउंटेबल मैनेजर इसिड्रो पोर्केरस को 24 घंटे में जवाब देने का निर्देश देते हुए नोटिस भेजा है।
DGCA का मानना है कि एक साथ इतनी उड़ानों का प्रभावित होना प्लानिंग, सुपरविजन और क्रू मैनेजमेंट से जुड़े गंभीर कमी की ओर इशारा करता है।

DGCA ने कहा कि संशोधित FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) नियम लागू करने के लिए इंडिगो ने पर्याप्त तैयारी नहीं की। इसे Aircraft Rules, 1937 और संबंधित CAR नियमों का उल्लंघन माना गया है। यात्रियों की सुविधा से जुड़े नियमों का पालन न करने के भी कई मामले सामने आए हैं—जहां यात्रियों को अनिवार्य जानकारी, भोजन और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गईं।

मंत्रालय का कड़ा रुख — हाई लेवल कमेटी तेज़ी से रिपोर्ट तैयार करेगी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय पहले ही इस मामले की जांच के लिए 4 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित कर चुका है। अब मंत्रालय ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वह रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपे और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान स्पष्ट करे।

मंत्रालय को इंडिगो का अब तक दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं लगा है। इसके आधार पर वित्तीय और दंडात्मक कार्रवाई दोनों की संभावना खुली है।

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने इंडिगो CEO के साथ बैठक की, जिसमें DGCA प्रमुख फैज़ अहमद किदवई और उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे। बैठक में दो टूक कहा गया कि FDTL नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए और यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।

इंडिगो की सफाई — “नेटवर्क रीबूट कर रहे हैं”

इंडिगो ने बयान जारी कर बताया कि उसने पूरे नेटवर्क को ‘रीबूट’ करने के लिए उड़ानें रद्द कीं।
कंपनी ने दावा किया कि:

  • 700+ फ्लाइट्स ऑपरेट की गईं
  • 113 डेस्टिनेशन जुड़े
  • 138 में से 135 रूट पर सेवाएं बहाल

इंडिगो का कहना है कि वह स्थिति को सामान्य करने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है और अगले कुछ दिनों में रद्द उड़ानों की संख्या और कम होगी। एयरलाइन ने यात्रियों से असुविधा के लिए माफी भी मांगी।

रेलवे बनी सबसे बड़ी मदद — 89 स्पेशल ट्रेनें

फ्लाइट कैंसिलेशन से लाखों लोग प्रभावित हुए, ऐसे में रेलवे ने राहत देते हुए 89 स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है, जो 3 दिनों में 100 से ज्यादा यात्राएं करेंगी।

नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, पटना और हावड़ा जैसे बड़े शहरों के लिए विशेष सेवाएं शुरू की गई हैं। एयरपोर्ट्स पर भी जानकारी देने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि फंसे हुए यात्रियों को तुरंत वैकल्पिक सुविधा मिल सके।

एयरपोर्ट्स पर हालात — कई बड़े शहरों में भारी रद्दीकरण

  • चेन्नई: 38 फ्लाइट्स रद्द
  • दिल्ली: 86 फ्लाइट्स रद्द (37 प्रस्थान, 49 आगमन)
  • कोलकाता: 41 फ्लाइट्स पर असर
  • बेंगलुरु: 150 फ्लाइट्स रद्द (76 आगमन, 74 प्रस्थान)
  • हैदराबाद: 115 फ्लाइट्स रद्द

कुछ एयरपोर्ट्स पर भीड़ नियंत्रित रही, लेकिन कई जगह यात्रियों को अतिरिक्त इंतजार और परेशानियों का सामना करना पड़ा।

चिदंबरम का हमला

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि एयरलाइन सेक्टर में डुओपॉली स्थिति के चलते किराए पर नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडिगो संकट सिर्फ एयरलाइन की गलती नहीं है—यह DGCA और केंद्र सरकार की संयुक्त नाकामी भी है, क्योंकि FDTL नियम 23 महीने पहले लागू हुए थे, लेकिन एयरलाइंस को ठीक से गाइड नहीं किया गया।

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