तेजस्वी की ताजपोशी पर बहन रोहिणी ने कसा तंज

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव पर बहन रोहिणी आचार्य की टिप्पणी ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी

RJD में संगठनात्मक बदलाव, तेजस्वी यादव बने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्षराष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीति में एक अहम बदलाव देखने को मिला है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, तेजस्वी यादव की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस फैसले पर तंज कसा।रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह एक तरह से राजनीति के शिखर तक पहुंचने की यात्रा का अहम पड़ाव है और साथ ही पार्टी के भीतर मौजूद कुछ गुटों पर भी निशाना साधा।उनके बयान के बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया है, जिससे RJD की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है ‘सियासत के शिखर – पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप , ठकुरसुहाती करने वालों और ” गिरोह – ए – घुसपैठ ” को उनके हाथों की “कठपुतली बने शहजादा” की ताजपोशी मुबारक’ ..

https://x.com/i/status/2015335330019480062

बिहार चुनाव के बाद लालू परिवार में बढ़ा तनाव

अंदरूनी मतभेद आए सामनेबिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही लालू प्रसाद यादव के परिवार में आपसी मतभेद सामने आने लगे थे। इस दौरान रोहिणी आचार्य ने कई बार तेजस्वी यादव के सलाहकारों को लेकर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि जब इन मुद्दों पर कोई सवाल करता है, तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है।मीडिया से बातचीत के दौरान रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा था कि उनके माता-पिता से उनके संबंध हमेशा अच्छे रहेंगे, लेकिन अब उनका परिवार से कोई जुड़ाव नहीं है। इसके बाद वह पटना छोड़कर सिंगापुर लौट गई थीं। तभी से वह सोशल मीडिया के माध्यम से तेजस्वी यादव पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधती रही हैं।

रोहिणी आचार्य से पहले लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी कई बार तेजस्वी यादव पर सवाल उठा चुके हैं। तेज प्रताप ने आरोप लगाया था कि पार्टी और परिवार में मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें जानबूझकर अलग-थलग कर दिया है और बाहर करने की साजिश रची गई है।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार में यह कलह क्यों बढ़ रही है। क्या इसके पीछे राजनीतिक विरासत की लड़ाई है, या फिर परिवार और पार्टी के भीतर मौजूद कुछ लोग जानबूझकर मतभेद पैदा कर रहे हैं? यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि लालू यादव लगातार तेजस्वी यादव के समर्थन में खड़े नजर आए हैं। जिस तरह से उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, उससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय जनता दल की कमान अब पूरी तरह से तेजस्वी यादव के हाथों में है।लेकिन आने वाले समय में तेजस्वी यादव के सामने चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं, क्योंकि विरोध की आवाज़ें उनके अपने ही लोगों की ओर से उठ रही हैं। ऐसे में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह परिवार के भीतर से उठ रहे विरोध को किस तरह संभालते हैं और पार्टी को आगे किस दिशा में लेकर जाते हैं।अब यह देखना अहम होगा कि तेजस्वी यादव इन परिस्थितियों में पार्टी को किस मुकाम तक पहुंचा पाते हैं।

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