हामिद अंसारी का बयान: संसद अब पहले से काफी कम दिन बैठ रही है
संसद की कार्यप्रणाली पर हमीद अंसारी का बयान, लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर जताई चिंता
दिल्ली में संसद की कार्यवाही को लेकर पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व राज्यसभा सभापति हामिद अंसारी ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में संसद के बैठने के दिनों में लगातार कमी आई है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। अंसारी के अनुसार, पहले संसद हर साल औसतन 90 से 100 दिन बैठती थी, लेकिन अब यह घटकर केवल 50 से 60 दिन रह गई है। इसका सीधा असर संसद के कामकाज और उसकी भूमिका पर पड़ रहा है।
हामिद अंसारी ने कहा कि संसद का मूल उद्देश्य कानून बनाना, नीतियों पर चर्चा करना और सरकार की जवाबदेही तय करना है। जब संसद कम समय के लिए बैठती है, तो इन जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभा पाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर संसद की कार्यवाही में यह कमी क्यों आ रही है और इसके पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस खबर को पढ़कर वह हैरान रह गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन के नियमों के अनुसार लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन को सदन के संचालन से जुड़े मामलों में पूर्ण अधिकार प्राप्त होते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप संसदीय परंपराओं के खिलाफ माना जाता है।
हामिद अंसारी ने यह भी कहा कि पहले संसद की सुरक्षा व्यवस्था लोकसभा और राज्यसभा के अधीन होती थी, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है। उनके अनुसार, यह बदलाव संसदीय व्यवस्था की स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि संसद जैसे संवैधानिक संस्थान को कितनी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
पूर्व राज्यसभा सभापति ने यह सवाल भी उठाया कि क्या कोई शक्ति इतनी प्रभावशाली हो सकती है कि वह सदन के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की भूमिका को सीमित कर दे। उनके इस बयान के बाद संसद की कार्यस्वतंत्रता, अधिकारों और संवैधानिक संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हामिद अंसारी का मानना है कि संसद केवल एक औपचारिक संस्था नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ है। यदि इसकी गरिमा और अधिकारों को कमजोर किया जाता है, तो इसका असर पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद की भूमिका को मजबूत बनाए रखना देशहित में बेहद आवश्यक है।

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संजना झा पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह हिंदी माइक में बतौर असिस्टेंट एडिटर कार्यरत हैं। उन्हें समसामयिक घटनाएँ, राजनीति एवं लाइफस्टाइल जैसे विषयों में गहरी समझ और लेखन का व्यापक अनुभव प्राप्त है। अपनी खोजपरक दृष्टि, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विषयों की गहराई तक पहुंचने की शैली के लिए वह जानी जाती हैं।
ज्वाइनिंग डेट: 16 अगस्त 2025

