जेल से रिहाई के बाद आजम खान का गुस्सा

23 महीने की कैद के बाद आजम खान की रिहाई, समर्थकों ने किया जोरदार स्वागत, पुलिस से हुई बहस भी चर्चा का केंद्र

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान मंगलवार को सीतापुर जेल से रिहा हो गए। लगभग दो साल की कैद पूरी होने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल छा गया।

जेल से बाहर आते ही आजम खान ने मीडिया से दूरी बनाई। लेकिन रामपुर की ओर जाते समय रास्ते में पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग ने उन्हें नाराज कर दिया। उनके दोनों बेटे, अब्दुल्ला आजम और आदिब आजम, ने उनका स्वागत किया। सफेद कुर्ता-पायजामा और चश्मा पहने आजम खान पुलिस काफिले के साथ रामपुर की ओर रवाना हुए।

रास्ते में समर्थकों की भीड़ उमड़ गई, जिससे ट्रैफिक प्रभावित हुआ। रामपुर में पुलिस ने धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस पर आजम खान ने कहा कि यह लोग मेरे समर्थक नहीं, बल्कि आम नागरिक हैं और उन्हें रोकना गलत है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

आजम खान ने पुलिस से बहस करते हुए कहा कि आम जनता को परेशान करने की कोई जरूरत नहीं है। समर्थक नारे लगाते रहे, जबकि पुलिस ने ड्रोन और अन्य सुरक्षा उपाय का इस्तेमाल कर स्थिति नियंत्रण में रखी।

रिहाई के समय, कई स्थानीय नेताओं और समर्थकों ने भीड़ को संभालने में सहयोग किया। रास्ते में नागरिकों और समर्थकों ने आजम खान को फूल और नारों के साथ स्वागत किया। यह दृश्य दर्शाता है कि उनके प्रति जनता का उत्साह और समर्थन अभी भी कायम है।

इस घटना ने रामपुर में सियासी हलचल बढ़ा दी। समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि आजम परिवार को न्याय मिला है और पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने भाजपा पर झूठे मुकदमों का आरोप लगाते हुए कहा कि संघर्ष जारी रहेगा।

रामपुर में यह घटना न केवल राजनीतिक चर्चा का विषय बनी बल्कि स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती भी सामने लाई।

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