बासमती चावल: क्या भारत तोड़ेगा नया रिकॉर्ड?

भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन में तय होगी आगे की दिशा

भारतीय चावल निर्यातकों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. प्रेम गर्ग ने कहा कि पंजाब के किसान इस साल किसी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करेंगे क्योंकि सरकार ने पर्याप्त मदद उपलब्ध कराई है। उन्होंने बताया कि बासमती चावल की पैदावार प्रभावित नहीं होगी और इस साल कुल उत्पादन लगभग 12.8 से 12.9 मिलियन टन तक पहुँचने की संभावना है।

डॉ. गर्ग ने आगे कहा कि Bharat International Rice Conference में विदेशों से 1,000 से अधिक खरीदार भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, 2,500 से ज्यादा निर्यातक और किसान भी इस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं, जो भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि भारत दुनिया में सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। डॉ. गर्ग ने उम्मीद जताई कि इस साल या अधिकतम अगले साल भारत की बासमती चावल की निर्यात क्षमता 30 मिलियन टन तक पहुँच सकती है, जबकि पिछले कुछ वर्षों में यह केवल 22 मिलियन टन तक ही थी।

इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और किसानों के बीच सहयोग के कारण इस साल उत्पादन और निर्यात दोनों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। भारत के निर्यातक इस समय बासमती चावल की मांग बढ़ाने के लिए वैश्विक बाजारों में सक्रिय हैं, और यह सम्मेलन इसी प्रयास का हिस्सा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की उच्च उत्पादकता और निर्यात की योजना भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यह न केवल किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी, बल्कि देश की वैश्विक चावल बाजार में स्थिति को भी मजबूत करेगी।

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