क्या है D2M टेक्नोलॉजी? जानिए पूरी जानकारी

D2M टेक्नोलॉजी के रोलआउट में देरी, नीति बनने का इंतजार – अरविंद वोहरा का बयान

डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) टेक्नोलॉजी को लेकर देश में लंबे समय से चर्चा चल रही है। इस तकनीक के माध्यम से डिजिटल कंटेंट सीधे मोबाइल डिवाइसेज पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी डिजिटल सेवाएं पहुँच सकेंगी। लेकिन इस तकनीक के रोलआउट में अब तक देरी का मुख्य कारण नीति (Policy) की प्रतीक्षा बताया जा रहा है।

सीरियल निवेशक, उद्यमी और परोपकारी अरविंद वोहरा ने हाल ही में इस विषय पर अहम टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि “इस टेक्नोलॉजी पर पहले ही एक रिपोर्ट जुलाई 2005 में लोक सभा में प्रस्तुत की जा चुकी है। साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को इसे आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।”

अरविंद वोहरा के अनुसार, “सरकार की प्रक्रियाएं पूरी होते ही नेटवर्क को रोलआउट किया जाएगा। यह टेक्नोलॉजी हार्डवेयर या इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारियों का नहीं, बल्कि नीति से जुड़ा मामला है। नीति लागू होते ही सामान्य प्रक्रिया के तहत नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो जाएगा। फिलहाल यह पूरी तरह से नीति पर निर्भर है।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि D2M टेक्नोलॉजी देश में डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मनोरंजन और अन्य डिजिटल सुविधाएं सीधे मोबाइल पर पहुंच सकेंगी, जिससे करोड़ों ग्रामीण उपयोगकर्ता लाभान्वित होंगे।

सरकारी स्तर पर इस नीति को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। नीति लागू होते ही संबंधित विभाग स्पेक्ट्रम आवंटन, लाइसेंसिंग, और अन्य आवश्यक कदम उठाकर टेक्नोलॉजी को व्यावसायिक रूप से लागू करेंगे।

अरविंद वोहरा का यह भी कहना है कि तकनीक की तैयारी पूरी है, केवल नीति के लागू होने का इंतजार है। इससे देशभर में डिजिटल इंडिया मिशन को और गति मिलेगी।

अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस नीति को कब तक अंतिम रूप देगी और D2M टेक्नोलॉजी का नेटवर्क कब तक आम उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगा।

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