इसरो का गगनयान मिशन: दिसंबर में पहला मानवरहित प्रक्षेपण
ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने कहा – 2027 की पहली तिमाही तक अंतरिक्ष में जाएगा भारत का पहला गगनयात्री
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने सबसे बड़े मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि मिशन अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और इसकी तैयारियां तेज़ी से पूरी की जा रही हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि इस साल दिसंबर तक गगनयान का पहला मानवरहित मिशन प्रक्षेपित किया जाएगा। इस उड़ान में किसी मानव को नहीं भेजा जाएगा, बल्कि उसकी जगह ‘व्योममित्रा’ नाम का हाफ-ह्यूमनॉइड अंतरिक्ष में जाएगा। इसका मकसद अंतरिक्ष यान की सुरक्षा और तकनीकी प्रणाली की गहराई से जांच करना है।
नारायणन ने बताया कि दिसंबर का मिशन सफल होने के बाद, अगले वर्ष दो और मानवरहित मिशन पूरे किए जाएंगे। इसके बाद साल 2027 की पहली तिमाही तक भारत अपने पहले ‘गगनयात्री’ को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहा है। यह अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित वापसी के साथ भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों में एक नया अध्याय जोड़ेगा।
इसरो प्रमुख ने कहा कि गगनयान के लिए अंतरिक्ष यात्रियों का चयन पहले ही किया जा चुका है। सभी चयनित उम्मीदवारों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें आपात स्थिति से निपटने, स्पेसक्राफ्ट संचालन और लंबी अवधि तक अंतरिक्ष में रहने जैसी परिस्थितियों के लिए अभ्यास शामिल है।
गगनयान मिशन भारत के लिए सिर्फ तकनीकी चुनौती नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय गर्व से जुड़ा कदम भी है। इससे भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल होगा, जिन्होंने अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजा है।
नारायणन ने कहा कि पूरी इसरो टीम दिन-रात काम कर रही है। उनका विश्वास है कि यह मिशन समय पर और सफलतापूर्वक पूरा होगा। उन्होंने कहा, “गगनयान देश के युवाओं को नई दिशा देगा और आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक की ओर आकर्षित करेगा।”

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संजना झा पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह हिंदी माइक में बतौर असिस्टेंट एडिटर कार्यरत हैं। उन्हें समसामयिक घटनाएँ, राजनीति एवं लाइफस्टाइल जैसे विषयों में गहरी समझ और लेखन का व्यापक अनुभव प्राप्त है। अपनी खोजपरक दृष्टि, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विषयों की गहराई तक पहुंचने की शैली के लिए वह जानी जाती हैं।
ज्वाइनिंग डेट: 16 अगस्त 2025

