AI से बदलेगा समीकरण? भारत-भूटान बातचीत में नई दिशा के संकेत

AI और सतत विकास पर सहयोग बढ़ाने पर जोर, पारंपरिक मित्रता को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भूटान के प्रधानमंत्री Tshering Tobgay के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात को भारत-भूटान संबंधों के लिए एक नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक को “उत्कृष्ट” बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को वैश्विक भलाई और सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि AI जैसी उभरती तकनीकें आने वाले समय में विकास की नई संभावनाएं खोल सकती हैं। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति को पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता के साथ संतुलित रखना आवश्यक है। AI का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

भारत और भूटान के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच विश्वास, सद्भावना और जनता-से-जनता के गहरे रिश्ते इस साझेदारी की नींव हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यही पारस्परिक भरोसा दोनों देशों को नए और परिवर्तनकारी क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है

भारत भूटान का एक प्रमुख विकास सहयोगी रहा है। बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने मिलकर कई परियोजनाएं पूरी की हैं। अब तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को विस्तार देने की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI और सतत विकास पर संयुक्त पहल दक्षिण एशिया क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश कर सकती है। यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत-भूटान साझेदारी को नई पहचान देगा।

यह बैठक दर्शाती है कि पारंपरिक मित्रता अब आधुनिक और भविष्य-उन्मुख सहयोग में बदल रही है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की संभावना है।

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