कोइलख में मां भद्रकाली मंदिर चोरी के आरोपी फरार, जनप्रतिनिधियों की आवाज़ बेअसर

20 लाख की चोरी के महीनों बाद भी आरोपी फरार, जनप्रतिनिधियों की आवाज़ बेअसर

बिहार के मुख्यमंत्री और पूरी बिहार सरकार पर जब भी कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठता है, तो जोर-शोर से कहा जाता है कि बिहार में “सुशासन” का राज है — न किसी को फंसाया जाता है, न किसी को बचाया जाता है।

लेकिन मधुबनी जिले की एक घटना जिला प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

दरअसल, मधुबनी जिला स्थित राजनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कोइलख पंचायत में मां भद्रकाली के प्रसिद्ध मंदिर में लगभग 20 लाख रुपये से अधिक के सोना-चांदी के आभूषण और नगदी की चोरी की घटना को अंजाम दिया गया। इस घटना को हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अपराधी अब तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।

इस मामले में पंचायत के मुखिया शेखर सुमन सहित मंदिर के तमाम पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने एसपी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। धरना-प्रदर्शन भी किया गया। बाद में इस मुद्दे को क्षेत्र के स्थानीय विधायक सुजीत पासवान और विधान परिषद सदस्य घनश्याम ठाकुर ने भी सदन में उठाया। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

जनप्रतिनिधियों से लेकर मंदिर के पदाधिकारियों और आम ग्रामीणों तक सभी यह जानना चाहते हैं कि घटना को अंजाम देने वाले अपराधी आखिर कब पकड़े जाएंगे। लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस के हाथ खाली दिखाई दे रहे हैं।

मधुबनी की यह घटना इकलौती नहीं है। हाल के दिनों में दरभंगा में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में हुई अन्य घटनाओं ने भी कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

वर्तमान में गृह विभाग भाजपा कोटे से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है। भाजपा नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि बिहार में सुशासन का नया अध्याय शुरू हुआ है। लेकिन सवाल उठता है कि यह कैसा सुशासन है, जहां अपराधी अब तक पकड़े नहीं गए?

हैरानी की बात यह है कि पंचायत के मुखिया, क्षेत्र के विधायक और विधान परिषद में आवाज उठाने वाले घनश्याम ठाकुर — सभी भाजपा से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद यदि उनकी आवाज प्रशासन तक नहीं पहुंच रही, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

ऐसे में बड़ा प्रश्न यही है कि जब सत्ताधारी दल के नेताओं की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम नागरिकों की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद किससे की जाए? स्थिति ऐसी प्रतीत होती है कि अब तो भगवान का स्थल भी सुरक्षित नहीं है।

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