लोकसभा में टकराव, राहुल के आरोपों पर सत्ता पक्ष का विरोध

लोकसभा में राहुल गांधी का सरकार पर हमला, कुछ शब्द रिकॉर्ड से हटाए गए

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए। अपने भाषण में उन्होंने सरकार की नीतियों, बड़े उद्योगपतियों से कथित नजदीकियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार के कुछ फैसलों से देश के संसाधनों और संस्थाओं को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और बड़े कारोबारी घरानों के बीच संबंधों को लेकर पारदर्शिता नहीं है। इसी क्रम में उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय विवाद से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए कुछ नामों का जिक्र किया। उनके बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई।

सदन में हंगामा बढ़ने पर पीठासीन अधिकारी ने हस्तक्षेप किया। बाद में राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से हटाने का निर्णय लिया गया। संसदीय नियमों के तहत यदि किसी बयान को असंसदीय या अप्रमाणित माना जाता है तो उसे रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका आरोप था कि महत्वपूर्ण फैसलों पर संसद में खुली और विस्तृत चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने आर्थिक नीतियों और विदेश संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।

वहीं, सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्रियों ने कहा कि विपक्ष बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। उनका कहना था कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और देशहित सर्वोपरि है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने यह भी कहा कि बिना ठोस प्रमाण के नाम लेना उचित नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सदन का माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा। बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत पहले से ही मिल रहे थे, और इस भाषण के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

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