Raj Thackeray ने बदली रणनीति, अब सिर्फ इस मुद्दे पर फोकस करेगी मनसे

पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश, अगले तीन साल संगठन मजबूत करने और जमीनी तैयारी पर दें पूरा ध्यान

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने हाल ही में पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि अब संगठन की पूरी ऊर्जा और रणनीति केवल चुनाव पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अब तक कई आंदोलन किए हैं और विभिन्न मुद्दों पर अपनी भूमिका मजबूती से रखी है, लेकिन अब समय आंदोलन से आगे बढ़कर चुनावी तैयारी पर पूरा ध्यान देने का है। राज ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी का मुख्य कार्यक्रम अब चुनाव ही होना चाहिए।

उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करते हुए बताया कि अगले तीन वर्षों तक कोई बड़ा चुनाव नहीं है। इस समय को बेकार गंवाने के बजाय संगठन को मजबूत करने में लगाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यही सही समय है जब जमीनी स्तर पर काम शुरू किया जाए, बूथ स्तर तक नेटवर्क तैयार किया जाए और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाए।

राज्य भर से आए मनसे नेताओं से उन्होंने अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय होकर संगठन को नई मजबूती दें। शुक्रवार को आयोजित इस बैठक में उन्होंने नेताओं को उत्साहित करते हुए कहा कि आने वाला समय संगठन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

राज ठाकरे ने अपने भाषण में यह भी कहा कि हर चीज की एक एक्सपायरी डेट होती है। आज जो लोग सत्ता में हैं, उनकी भी एक समय-सीमा तय है। कोई भी व्यवस्था या सत्ता हमेशा कायम नहीं रहती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब भी कई लोगों को लगता था कि कांग्रेस को कौन हिला सकता है। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और सत्ता परिवर्तन हुआ।

इसी बीच हाल के दिनों में गैर-मराठी भाषी लोगों के साथ कथित मारपीट और विवादों का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। इस पृष्ठभूमि में पार्टी की रणनीति और राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि अपने संबोधन में राज ठाकरे का मुख्य फोकस संगठन को चुनावी रूप से मजबूत करने पर ही रहा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को समझाया कि राजनीति में स्थायी कुछ भी नहीं होता, इसलिए निराश होने की जरूरत नहीं है। अगर संगठन मजबूत होगा और चुनाव की तैयारी ठोस होगी, तो अवसर आने पर पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। राज ठाकरे का पूरा जोर इस बात पर रहा कि आने वाले वर्षों में मनसे को आंदोलन से ज्यादा संगठन और चुनावी रणनीति पर ध्यान देना होगा।

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