1965 युद्ध की डायमंड जुबली पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संदेश

भारतीय सैनिकों की वीरता को याद करते हुए कहा – देश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1965 के भारत-पाक युद्ध की डायमंड जुबली पर भारतीय सैनिकों की बहादुरी और बलिदान को याद किया। इस मौके पर आयोजित स्मृति समारोह में शामिल होकर उन्होंने कहा कि देश कभी नहीं भूल सकता कि 1965 के युद्ध में भारतीय सेना ने किस तरह से दुश्मन को करारा जवाब दिया और मातृभूमि की रक्षा की।

राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में खासकर असल उत्तर की लड़ाई, चाविंडा की लड़ाई और फिल्लौरा की लड़ाई का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन युद्धों में भारतीय सैनिकों ने न केवल पाकिस्तान की रणनीति को ध्वस्त किया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय सेना का हौसला और जज़्बा अटूट है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान उस समय यह सोचकर चला था कि वह घुसपैठ, गुरिल्ला रणनीति और अचानक हमलों से भारत को डराने में सफल हो जाएगा। लेकिन पाकिस्तान को यह अंदाज़ा नहीं था कि भारतीय सैनिकों की हर सांस मातृभूमि के लिए समर्पित है। हर भारतीय जवान इस भावना से सेवा करता है कि राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता पर कोई भी आंच नहीं आने दी जाएगी, चाहे इसके लिए कितनी भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।

उन्होंने आगे कहा कि 1965 का युद्ध सिर्फ एक सैन्य जीत नहीं थी, बल्कि यह उस राष्ट्रीय एकता और सामूहिक साहस का प्रतीक था जिसने पूरे भारत को एक सूत्र में बाँध दिया। गांव से लेकर शहर तक, हर नागरिक ने अपने तरीके से सेना का मनोबल बढ़ाया। यही कारण है कि भारतीय सैनिक दुश्मन को हर मोर्चे पर मात देने में सफल हुए।

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा कि उनकी वीरता और बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित किया है और करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आज का भारत सुरक्षित है क्योंकि 1965 में हमारे जवानों ने देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाया था।

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