SIR नोटिस पर चुनाव आयोग की सफाई, पूर्व नेवी चीफ अरुण प्रकाश को क्यों बुलाया गया?

एसआईआर नोटिस पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण, पूर्व नेवी चीफ से पहचान सत्यापन क्यों मांगा गया


चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत पूर्व नेवी चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) को भेजे गए नोटिस को लेकर उठे सवालों पर अब आयोग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सोमवार, 12 जनवरी 2026 को जारी बयान में चुनाव आयोग ने कहा कि यह नोटिस किसी विशेष कारण से नहीं, बल्कि एक तकनीकी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया था।
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर के दौरान गोवा के कोर्टालिम विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 43 में संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा अरुण प्रकाश का कैलकुलेशन फॉर्म जमा किया गया था। हालांकि, इस फॉर्म में पिछली एसआईआर से जुड़े कई अनिवार्य विवरण शामिल नहीं थे।

किन जानकारियों की कमी थी?
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर डॉ. मेडोरा एरमोमिला डी कोस्टा ने बताया कि फॉर्म में मतदाता का नाम, ईपीआईसी नंबर, रिश्तेदार का नाम, विधानसभा क्षेत्र का नाम और संख्या, भाग संख्या और मतदाता सूची में क्रम संख्या जैसे जरूरी विवरण नहीं भरे गए थे।
इन जानकारियों के बिना बीएलओ एप्लिकेशन फॉर्म को मौजूदा वोटर लिस्ट से स्वचालित रूप से मिलान नहीं कर सका।

सिस्टम ने क्यों भेजा नोटिस?
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आवश्यक विवरणों के अभाव में सिस्टम ने फॉर्म को “अनमैप कैटेगरी” में डाल दिया, जिसके बाद एसआईआर प्रक्रिया के तहत आगे सत्यापन के लिए सुनवाई नोटिस स्वतः जारी हो गया। यह पूरी तरह से एक मानक और सिस्टम-आधारित प्रक्रिया है।

सोशल मीडिया पर उठी थी चिंता
इस नोटिस के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए थे, खासकर इसलिए क्योंकि एडमिरल अरुण प्रकाश न सिर्फ पूर्व नेवी चीफ रह चुके हैं, बल्कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी भूमिका के लिए उन्हें वीर चक्र से भी सम्मानित किया जा चुका है। वह सेवानिवृत्ति के बाद गोवा में रह रहे हैं।

एडमिरल अरुण प्रकाश की प्रतिक्रिया
एडमिरल अरुण प्रकाश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें किसी भी तरह की विशेष सुविधा की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने एसआईआर फॉर्म नियमानुसार भरा था और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देखकर संतुष्टि भी हुई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि वे चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिस का पूरा पालन करेंगे।

एसआईआर के तहत सत्यापन अनिवार्य
चुनाव आयोग ने दोहराया कि एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखना है। यदि किसी फॉर्म का सिस्टम से मिलान नहीं हो पाता, तो सुनवाई के माध्यम से सत्यापन किया जाना अनिवार्य होता है ताकि मतदाता को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिल सके।

Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *