तेजस्वी बोले – पीएम मोदी की भाषा शर्मनाक

तेजस्वी बोले — “प्रधानमंत्री को उपयोगी बातें करनी चाहिए”

महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेजस्वी ने पीएम मोदी के बयान को “नीच स्तर की राजनीति” करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को बिहार के विकास पर बात करनी चाहिए, न कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल जो समाज में नकारात्मकता फैलाएं।

तेजस्वी यादव ने कहा, “जैसी जिसकी सोच, वैसी उसकी भावना। हम इस तरह की बातें नहीं करते। हमें समझ नहीं आता कि प्रधानमंत्री को ऐसे शब्द बोलने में आनंद क्यों आता है। जब वे गुजरात जाते हैं, तो फैक्ट्रियां लगाने और उद्योग बढ़ाने की बातें करते हैं। लेकिन जब बिहार आते हैं, तो बंदूक और अपराध की बातें करते हैं। क्या यही स्तर रह गया है देश के प्रधानमंत्री के भाषणों का?”

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री को अपने कामों की सूची जनता के सामने रखनी चाहिए। “प्रधानमंत्री को यह बताना चाहिए कि उन्होंने बिहार के लिए पिछले दस सालों में क्या किया। कितने उद्योग लगाए, कितनी नौकरियां दीं। लेकिन वे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बातें करते हैं,” तेजस्वी ने कहा।

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आरजेडी नेता ने यह भी कहा कि बिहार के लोग अब केवल विकास, शिक्षा और रोजगार की राजनीति चाहते हैं। “लोग अब नफरत और तंज वाली राजनीति से तंग आ चुके हैं। बिहार की जनता जागरूक है। उन्हें अब झूठे वादे नहीं चाहिए। प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया गया,” उन्होंने कहा।

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि महागठबंधन बिहार के भविष्य के लिए एक मजबूत विकल्प है। “हमारी सरकार ने गरीबों और युवाओं के लिए काम किया। हम चाहते हैं कि बिहार आत्मनिर्भर बने, ताकि हमारे लोगों को दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े,” तेजस्वी ने कहा।

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र यह बयानबाज़ी राजनीतिक माहौल को और गर्म कर रही है। जहां बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास और सुशासन का मुद्दा उठा रही है, वहीं महागठबंधन के नेता बेरोज़गारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे स्थानीय मुद्दों को चुनावी केंद्र बना रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तेजस्वी का यह बयान बिहार की जनता में भावनात्मक प्रभाव डालने की कोशिश है, ताकि वे खुद को एक “संवेदनशील और जमीन से जुड़े” नेता के रूप में पेश कर सकें।

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