वेनेजुएला संकट गहराया: अमेरिकी कार्रवाई में मादुरो गिरफ्तार, मचाडो ने तोड़ी चुप्पी
अमेरिकी कार्रवाई के बाद सत्ता समीकरण बदले, मचाडो ने लोकतंत्र के समर्थन में बताया बड़ा कदम
अमेरिका द्वारा 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। इस घटनाक्रम पर वेनेजुएला की जानी-मानी विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी कोई हालिया बातचीत नहीं हुई है और दोनों के बीच आखिरी संवाद अक्टूबर 2025 में हुआ था।
मचाडो ने बताया कि जिस दिन नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की गई थी, उसी दिन उन्होंने ट्रंप से फोन पर बात की थी। इसके बाद से दोनों के बीच कोई संपर्क नहीं रहा। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मचाडो को लंबे समय से मादुरो शासन के खिलाफ सबसे मजबूत चेहरा माना जाता रहा है। वह हाल ही में नॉर्वे गई थीं, जहां उन्होंने नोबेल पुरस्कार समारोह में हिस्सा लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द ही वेनेजुएला लौटने की तैयारी कर रही हैं।
अमेरिकी कार्रवाई को लेकर मचाडो ने सकारात्मक रुख अपनाया। उनके अनुसार, यह कदम केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, स्वतंत्रता और आम नागरिकों के अधिकारों के पक्ष में उठाया गया संदेश है। उनका मानना है कि इससे देश में राजनीतिक बदलाव की उम्मीद और मजबूत होगी। इसी बीच, 5 जनवरी 2026 को वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, जिससे सत्ता व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बयान दिया कि मादुरो को अपने ही देश में व्यापक समर्थन हासिल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका मचाडो के साथ किसी तरह के संयुक्त राजनीतिक प्रयास में शामिल नहीं होगा। मादुरो और उनकी पत्नी ने अमेरिकी संघीय अदालत में पेश होकर ड्रग तस्करी समेत सभी आरोपों को खारिज किया। मादुरो के बेटे ने भी बयान जारी कर पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की अपील की और कहा कि सच्चाई समय के साथ सामने आएगी।
वेनेजुएला की अहमियत सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। देश के पास 303 अरब बैरल का तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल क्षेत्र के पुनर्गठन में भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, अमेरिकी कंपनियां वहां के तेल ढांचे में भारी निवेश के लिए तैयार हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक मंच पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मादुरो की गिरफ्तारी और मचाडो की सक्रिय भूमिका से वेनेजुएला में राजनीतिक समीकरणों और आर्थिक निवेश दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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संजना झा पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह हिंदी माइक में बतौर असिस्टेंट एडिटर कार्यरत हैं। उन्हें समसामयिक घटनाएँ, राजनीति एवं लाइफस्टाइल जैसे विषयों में गहरी समझ और लेखन का व्यापक अनुभव प्राप्त है। अपनी खोजपरक दृष्टि, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विषयों की गहराई तक पहुंचने की शैली के लिए वह जानी जाती हैं।
ज्वाइनिंग डेट: 16 अगस्त 2025

