बजट 2026-27: निर्मला सीतारमण ने पेश किया लगातार नौवां बजट, विकास और आत्मनिर्भरता पर जोर

बजट 2026-27 में आत्मनिर्भर भारत, रोजगार सृजन, MSME प्रोत्साहन, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और आर्थिक विकास को मिली नई दिशा।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करते हुए बजट 2026-27 संसद में प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों, सुधारों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका पेश किया।

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति स्थिरता, वित्तीय अनुशासन, निरंतर विकास और कम महंगाई के कारण मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि यह अनिश्चित और कठिन समय में लिए गए सोच-समझकर फैसलों का परिणाम है।

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत पर जोर देते हुए कहा कि सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाई है, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की है और आवश्यक आयात पर निर्भरता कम की है। साथ ही, नागरिकों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, क्रय शक्ति बढ़ाने और सार्वभौमिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई सुधार किए गए हैं, जिससे लगभग 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल हुई है।


आर्थिक विकास को गति देने के लिए वित्त मंत्री ने छह प्रमुख क्षेत्रों में सुधारों का प्रस्ताव रखा। इनमें सात रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का पुनरुद्धार, चैंपियन MSME तैयार करना, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना तथा शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास शामिल है।

आर्थिक विकास को गति देने के लिए वित्त मंत्री ने छह प्रमुख क्षेत्रों में सुधारों का प्रस्ताव रखा। इनमें सात रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का पुनरुद्धार, चैंपियन MSME तैयार करना, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना तथा शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास शामिल है।

वैश्विक परिस्थितियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में व्यापार, बहुपक्षवाद और सप्लाई चेन पर दबाव है। नई तकनीकें उत्पादन प्रणाली को बदल रही हैं और पानी, ऊर्जा व जरूरी खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत को वैश्विक बाजारों से जुड़कर निर्यात बढ़ाने और दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने की जरूरत है।

बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करने की घोषणा की गई। साथ ही, इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स के माध्यम से तकनीक और कुशल कार्यबल विकसित करने पर जोर दिया गया।


उच्च तकनीक से जुड़े कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें फायर फाइटिंग उपकरण, लिफ्ट और टनल बोरिंग मशीन जैसी मशीनें शामिल होंगी।

वित्त मंत्री ने मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने, खादी और हथकरघा को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने और 10,000 करोड़ रुपये का MSME ग्रोथ फंड बनाने की घोषणा की।

पर्यावरण के अनुकूल कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में डंकुनी से पश्चिम में सूरत तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में 20 नए जलमार्ग शुरू किए जाएंगे। ओडिशा में नेशनल वॉटरवे-5 से इसकी शुरुआत होगी। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम भी विकसित किया जाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि GDP के मुकाबले कर्ज का अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान

लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और चिकित्सा के लिए TCS दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी बजट में शामिल है।

बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और सोलर ग्लास निर्माण से जुड़े उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी में छूट देने की घोषणा की गई। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले विमानों के पुर्जों के लिए आयातित कच्चे माल पर भी कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत देते हुए 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट और दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी 7 नई श्रेणियों को आयात शुल्क में छूट की सूची में शामिल किया गया है।

SEZ से जुड़ी इकाइयों को लेकर सरकार ने एकमुश्त राहत उपाय की घोषणा की है, जिसके तहत योग्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को घरेलू टैरिफ एरिया में रियायती दरों पर बिक्री की अनुमति दी जाएगी, हालांकि इसकी सीमा तय अनुपात तक होगी।

कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में सरकार ने आर्थिक विकास, आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और सामाजिक कल्याण पर विशेष फोकस रखा है।

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