भागलपुर सीट ड्रामा! अश्विनी चौबे के बेटे ने नामांकन से पहले बदल दिया फैसला

भागलपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय नामांकन से पहले अर्जित चौबे ने पलटा फैसला, भाजपा में बने रहेंगे

भागलपुर, बिहार: भागलपुर विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट न मिलने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे ने पहले निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। उनके इस कदम ने पार्टी और स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी थी। शनिवार को वे अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने एसडीओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन नामांकन टेबल तक पहुँचने से पहले ही उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया।

अर्जित ने मीडिया से कहा कि उन्हें उनके पिता अश्विनी चौबे का फोन आया, जिसमें कहा गया,

“तुम बीजेपी में हो और बीजेपी में ही रहोगे।”

पिता के आदेश का सम्मान करते हुए अर्जित ने निर्दलीय नामांकन वापस लिया और भाजपा के अनुशासन में बने रहने का निर्णय किया। उन्होंने कहा,

“मैंने परिवार और पार्टी के मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। मैं अब भाजपा के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करूंगा।”

जानकारी के अनुसार, भाजपा ने भागलपुर से रोहित पांडे को उम्मीदवार बनाया है, जिससे अर्जित चौबे पहले नाराज थे। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ जुलूस निकाला और नामांकन की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन पिता और पार्टी नेतृत्व के लगातार दबाव के बीच उन्होंने आखिरी वक्त पर घर वापसी कर ली।

अर्जित ने कहा कि अब वे एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में पूरी ईमानदारी से प्रचार करेंगे। उनका यह कदम भाजपा और परिवार के प्रति वफादारी का संदेश भी है।

विश्लेषक मानते हैं कि यह घटना भाजपा और एनडीए के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे गुटबंदी और विरोधाभास कम हुआ। साथ ही यह दिखाता है कि संगठन और अनुशासन पार्टी में सर्वोपरि हैं।

भागलपुर की राजनीति में इस कदम के बाद हलचल बढ़ गई है। अब स्थानीय कार्यकर्ता और जनता यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि अर्जित का समर्थन एनडीए उम्मीदवारों पर कितना प्रभाव डालेगा। इस फैसले से साफ है कि बिहार की सियासत में परिवार, पार्टी और अनुशासन का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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