तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ीं, सीट शेयरिंग विवाद से महागठबंधन में दरार

“नामांकन के बाद खुली महागठबंधन की कलह, कई सीटों पर अपने ही आमने-सामने”

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नामांकन की प्रक्रिया पूरी होते ही सियासत का पारा चढ़ गया है। एनडीए जहां एकजुट नजर आ रहा है, वहीं विपक्षी महागठबंधन में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। सीट बंटवारे पर सहमति न बनने से कई सीटों पर महागठबंधन के सहयोगी दल आमने-सामने हैं।

सीटों को लेकर बनी रही तकरार

आरजेडी ने इस बार 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस को 61 सीटें मिली हैं, जबकि माले 20, सीपीआई 9, सीपीएम 4, वीआईपी 15 और आईपी गुप्ता की पार्टी 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पिछले चुनाव के मुकाबले आरजेडी ने एक सीट कम और कांग्रेस ने नौ सीटें कम पर दांव लगाया है।

साथी ही बने प्रतिद्वंदी

नामांकन खत्म होते-होते महागठबंधन के भीतर अजीब स्थिति बन गई। कुल 11 सीटों पर दो-दो उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें छह सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस और आरजेडी आमने-सामने हैं। चार सीटों पर कांग्रेस की टक्कर वामपंथी दलों से है, जबकि एक सीट पर वीआईपी और आरजेडी के उम्मीदवार भिड़ रहे हैं।
वैशाली और तारापुर जैसी सीटों पर यह टकराव साफ दिख रहा है। दूसरे चरण की कुछ सीटों पर भी यही हाल है।

एनडीए को मिल सकता है फायदा

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि महागठबंधन की यह अंदरूनी कलह एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
जहां एनडीए ने नामांकन से पहले अपने मतभेद सुलझा लिए, वहीं विपक्ष के भीतर अभी भी सीटों को लेकर नाराज़गी बनी हुई है।
वोटों का बिखराव विपक्षी गठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता हैतेजस्वी यादव के लिए चुनौती भरा दौर

तेजस्वी यादव ने इस बार महागठबंधन का दायरा जरूर बढ़ाया, लेकिन तालमेल की कमी अब उनके लिए सिरदर्द बनती दिख रही है।
कई सीटों पर सहयोगी दलों के बीच सीधी टक्कर ने मतदाताओं को भी उलझन में डाल दिया है।
सियासी जानकारों का कहना है कि अगर यही हालात रहे तो विपक्ष को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और एनडीए को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।

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