मधुबनी की Sandip University समेत तीन विश्वविद्यालय डिफॉल्टर घोषित, छात्रों का भविष्य अधर में

UGC ने Amity, Dr. C.V. Raman और Sandip University को डिफॉल्टर घोषित किया

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने बिहार की तीन निजी विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर सूची में शामिल कर दिया है। इन विश्वविद्यालयों में

Amity University (Bailey Road, Patna)

Dr. C.V. Raman University (Bhagwanpur, Vaishali – Patna-Muzaffarpur)

Sandip University (Madhubani)

शामिल हैं।

UGC की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि इन विश्वविद्यालयों से डिग्री लेने वाले छात्रों को भविष्य में डिग्री की वैधता, उच्च शिक्षा में प्रवेश या सरकारी नौकरियों के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

आयोग ने सभी छात्रों और अभिभावकों को चेतावनी दी है कि किसी भी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता (Recognition) और वैधता (Validity) अवश्य जांच लें।

UGC ने कहा है कि यह कदम छात्रों के हितों की रक्षा और देश में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

Amity University, जो देश की सबसे प्रतिष्ठित और महंगी निजी विश्वविद्यालयों में से एक मानी जाती है, वहीं Sandip University बिहार के मधुबनी में स्थित है और मिथिला क्षेत्र के छात्रों के बीच अपनी लोकप्रियता के लिए जानी जाती है।

ऐसे में UGC द्वारा जारी की गई इस चेतावनी के बाद दोनों विश्वविद्यालयों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं, और इनसे जुड़े छात्रों का भविष्य फिलहाल अधर में लटक गया है।

हालांकि, तीनों ही विश्वविद्यालयों की ओर से अब तक UGC के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

वहीं, UGC ने अपने निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा है कि छात्र किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता (Recognition) और शैक्षणिक मानकों (Academic Standards) की अच्छी तरह जांच-पड़ताल अवश्य करें, और तभी किसी विश्वविद्यालय में दाखिला (Admission) लें।

क्या है UGC?

UGC (University Grants Commission) भारत सरकार का एक संवैधानिक निकाय है, जो देशभर के विश्वविद्यालयों को मान्यता देने, नियम तय करने, और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की निगरानी करने का कार्य करता है। यह संस्थान यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी विश्वविद्यालय बिना अनुमति या मान्यता के डिग्री प्रदान न करे।

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिना मान्यता प्राप्त किए ये विश्वविद्यालय इतने दिनों तक संचालित कैसे हो रहे थे?

साथ ही, वर्तमान में जो छात्र इन तीनों विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं, उनके भविष्य का क्या होगा?

क्या इन विश्वविद्यालयों के संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी, और क्या वर्तमान छात्रों को न्याय मिल पाएगा — यह फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

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