हॉर्मुज पर संकट! क्या तेल सप्लाई रुकते ही भारत बदलेगा अपना बड़ा दांव?

ईरान-इज़राइल तनाव के बीच वैश्विक बाजार में हलचल, रूस से तेल आयात बढ़ाने की अटकलें तेज

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र बना है हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है।

यह जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। यदि यहां आवाजाही बाधित होती है तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। हालिया तनाव के बाद आशंका जताई जा रही है कि अगर यह मार्ग बंद होता है या जहाजों की आवाजाही सीमित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और खाड़ी क्षेत्र उसकी आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में यदि हॉर्मुज मार्ग प्रभावित होता है तो भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ओर रुख करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थिति में भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने पर विचार कर सकता है, ताकि संभावित कमी की भरपाई की जा सके।

तेल की कीमतों में उछाल का असर केवल पेट्रोल और डीज़ल तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही व्यापार घाटा और रुपये की स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह स्थिति दीर्घकालिक आर्थिक चुनौती बन सकती है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो यह संकट वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय शक्तियां तनाव घटाने की दिशा में कदम उठाती हैं या हालात और जटिल हो जाते हैं।

Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *