विरोध के बीच नेपाल सरकार का यू-टर्न,सोशल मीडिया बैन हटाया

भारी विरोध और हिंसा के बाद नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से बैन हटाया

नेपाल सरकार ने पिछले हफ्ते फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाने का ऐलान किया था। इस फैसले के बाद से ही सरकार की कड़ी आलोचना हो रही थी और लगातार विरोध-प्रदर्शन तेज़ होते गए। हालात इतने बिगड़े कि इन प्रदर्शनों में लगभग 16 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए। हालांकि इन आंकड़ों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

भारी दबाव और विरोध के बीच अब नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाया गया बैन हटा लिया है।

क्यों लगाया गया था बैन?

28 अगस्त को नेपाल सरकार ने सभी सोशल मीडिया कंपनियों को रजिस्ट्रेशन के लिए सात दिन का समय दिया था। यह डेडलाइन 3 सितंबर की रात खत्म हो गई। लेकिन न तो मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप) और न ही अल्फाबेट (यूट्यूब) जैसी बड़ी कंपनियों ने आवेदन जमा किया। इसके बाद 4 सितंबर को मंत्रालय की बैठक में बैन लागू करने का फैसला लिया गया।

सरकार का कहना था कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के अनुरूप था, जिसमें कहा गया था कि नेपाल में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है।

आलोचना और विवाद

केपी शर्मा ओली सरकार ने संसद में एक नया विधेयक भी पेश किया था। सरकार का दावा था कि इस विधेयक का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण, जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करना है। लेकिन आलोचकों ने इसे असहमति की आवाज़ दबाने और विरोध करने वालों को निशाना बनाने का तरीका बताया।

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