अमेरिका का बड़ा फैसला: भारत की दवा एक्सपोर्ट पर 100% टैक्स?

“ट्रंप का नया फैसला अमेरिकी कंपनियों को प्रोत्साहित करेगा, लेकिन भारत के फार्मा सेक्टर पर पड़ सकता है असर”

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर से आयातित ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% टैक्स लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को देश में दवा निर्माण के लिए प्रोत्साहित करना और विदेशों पर निर्भरता कम करना बताया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की दवा एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है, खासकर ब्रांडेड और कॉम्प्लेक्स जेनेरिक दवाओं पर। भारत अमेरिका को अपनी दवाओं का तीसरा हिस्सा निर्यात करता है। FY24 में भारत ने अमेरिका को 8.7 बिलियन डॉलर (करीब 76,113 करोड़ रुपये) की दवाएं भेजीं, जो भारत के कुल दवा एक्सपोर्ट का लगभग 11% है। Choice Institutional Equities के अनुसार, 100% टैक्स से भारतीय फार्मा कंपनियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। FY25 में यह आंकड़ा लगभग 10 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

याद दिलाया जाए कि ट्रंप ने 2020 में कोविड-19 के दौरान हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के लिए भारत से दवा मंगाई थी। उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ग्रेट’ और ‘रियल गुड’ कहकर आभार जताया था। अमेरिका में उस समय कोविड के 3.6 लाख केस और करीब 10,000 मौतें हो चुकी थीं। ट्रंप ने भारत को दवाइयां न देने पर जवाबी कार्रवाई की धमकी भी दी थी। दिसंबर 2021 तक उन्होंने भारत से 29 मिलियन से ज्यादा डोज खरीदें। पहली खेप गुजरात से अमेरिका भेजी गई थी, जब अमेरिका में 4 लाख से अधिक केस और 13,000 से ज्यादा मौतें रिकॉर्ड हो चुकी थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की जेनेरिक दवाओं पर असर कम होगा, लेकिन स्पेशलिटी और पेटेंट वाली दवाओं में अमेरिकी टैक्स का प्रभाव बड़ा हो सकता है। यह कदम भारत-यूएस दवा व्यापार के लिए एक चुनौती साबित हो सकता है, और फार्मा कंपनियों को नई रणनीतियों पर विचार करना पड़ेगा।

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