अमेरिका में राजनीतिक टकराव से सरकारी कामकाज पर संकट

राजनीतिक टकराव से सरकारी कामकाज ठप होने के कगार पर, नागरिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी

अमेरिका की सीनेट मंगलवार की रात किसी भी वित्तीय प्रस्ताव को पास नहीं कर पाई। बैठक बिना नतीजे के स्थगित हो गई और तय समय सीमा भी खत्म हो गई। इस वजह से अब सरकारी शटडाउन की आशंका लगभग तय हो गई है।

शटडाउन की स्थिति में कई दफ्तर और सेवाएँ बंद हो जाएँगी। नॉन-एसेंशियल कामकाज पर रोक लग जाएगी और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को घर भेजना पड़ेगा। अनुमान है कि लगभग साढ़े सात लाख कर्मचारी अस्थायी तौर पर वेतन से वंचित रहेंगे। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों की आमदनी रोक देगी बल्कि उनके परिवारों के लिए भी आर्थिक संकट खड़ा करेगी।

हालांकि कुछ ज़रूरी कामकाज जारी रहेंगे। सेना, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पुलिस व्यवस्था, अस्पताल और सीमा सुरक्षा जैसी सेवाएँ रुकेंगी नहीं। लेकिन यहाँ भी दिक्कत यह रहेगी कि कर्मचारियों को भुगतान तभी होगा जब शटडाउन समाप्त होगा। सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और मेडिकेयर चेक भी चलते रहेंगे, लेकिन लोगों को भुगतान में देरी झेलनी पड़ सकती है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी प्रशासन कुछ कर्मचारियों की स्थायी छंटनी पर भी विचार कर सकती है। सामान्यत: शटडाउन खत्म होने के बाद फर्लो पर भेजे गए कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन मिल जाता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग हो सकती है।

यह संकट इसलिए गहराया क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी ने 21 नवंबर तक के लिए अस्थायी फंडिंग प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह पास नहीं हो सका। बहस के बाद हुए मतदान में केवल 55 वोट समर्थन में मिले, जबकि पारित करने के लिए 60 वोट आवश्यक थे। नतीजा यह हुआ कि सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच समझौता नहीं बन सका।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शटडाउन लंबा चला तो सरकारी कर्मचारियों की आय पर असर पड़ेगा ही, साथ ही म्यूजियम, पार्क और प्रशासनिक सेवाओं के बंद होने से आम नागरिक भी मुश्किल में पड़ सकते हैं। पर्यटन क्षेत्र को भी झटका लग सकता है और देश की आर्थिक गतिविधियों पर इसका असर देखने को मिलेगा। यही वजह है कि लोग चाहते हैं कि दोनों दल जल्द समझौते पर पहुँचें और संकट टल जाए।

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