’20 दिन भी नहीं हुए…’ अमेरिका पर भड़का ईरान, तेल बैन के बाद बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, तेल निर्यात की छूट खत्म होते ही तेहरान की कड़ी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को तेल निर्यात से जुड़ी दी गई अस्थायी छूट (ऑयल एक्सपोर्ट लाइसेंस) वापस ले ली है। इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की है। इन घटनाओं के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते को अभी 20 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं और अमेरिका ने पहले ही उसका उल्लंघन कर दिया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कदम को अंतरराष्ट्रीय समझौते की भावना के खिलाफ बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यदि वाशिंगटन इसी तरह की कार्रवाई जारी रखता है तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। तेहरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है।

उधर अमेरिका का कहना है कि हाल के दिनों में समुद्री व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद यह कार्रवाई की गई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि रणनीतिक जलमार्ग के आसपास हुई घटनाओं ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाल दिया था। इसी कारण ईरान को दी गई तेल निर्यात संबंधी राहत समाप्त करने और सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के दक्षिणी हिस्सों में स्थित बंदर अब्बास, सीरिक और अन्य क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि इन घटनाओं से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा तेल निर्यात की छूट वापस लेने से ईरान की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। वहीं इसका असर वैश्विक कच्चे तेल के बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बनी रहेगी।

फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर अमेरिका अपनी कार्रवाई को सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है, तो दूसरी ओर ईरान इसे समझौते का उल्लंघन बताते हुए जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दे रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर मध्य पूर्व के हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में यह तनाव क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

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