सुरक्षा का मतलब केवल उपाय नहीं, भरोसा भी-अजीत डोभाल

डोभाल ने कहा — “महिलाओं, कमजोर और वंचित वर्ग की सुरक्षा व सशक्तिकरण जरूरी, तभी संभव है समावेशी शासन”

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित एक व्याख्यान में कहा कि केवल सुरक्षा उपायों को अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि देश का हर नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे — चाहे खतरा बाहरी हो या आंतरिक।

उन्होंने कहा, “यह कहना पर्याप्त नहीं कि हमने पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए हैं। असली चुनौती यह है कि हर भारतीय नागरिक के भीतर सुरक्षा की भावना पैदा की जाए। जब तक व्यक्ति मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं करेगा, तब तक शासन की सफलता अधूरी रहेगी।”

डोभाल ने कहा कि सरकार का दायित्व सिर्फ खतरों से निपटना नहीं, बल्कि ऐसे विश्वसनीय निवारक तंत्र (credible deterrence) बनाना है, जो यह संदेश दे कि भारत किसी भी खतरे का सामना करने की इच्छाशक्ति और सामर्थ्य रखता है। उन्होंने कहा कि आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के खतरों से निपटने के लिए भारत की नीतियां और कानून मजबूत हैं, लेकिन इनका उद्देश्य भय नहीं, बल्कि विश्वास पैदा करना होना चाहिए।

NSA डोभाल ने अपने संबोधन में वंचित, कमजोर और हाशिए पर खड़े वर्गों की सुरक्षा और सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, “अच्छे शासन का अर्थ केवल नीतियां बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को भी यह महसूस हो कि शासन उसके साथ है।”

उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और समानता को भी सुशासन का मूल तत्व बताया। डोभाल ने कहा, “महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के बिना कोई भी देश आधुनिक शासन की परिभाषा को पूरा नहीं कर सकता। महिलाओं को समानता का अधिकार देना और उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना ही सच्चा सुशासन है।”

डोभाल ने यह भी कहा कि भारत की असली ताकत उसकी एकता, विविधता और सामूहिक जिम्मेदारी में निहित है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज में सद्भाव, जागरूकता और जिम्मेदारी का भाव बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

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