ट्रंप के दावों पर रूस ने दिया करारा जवाब

ट्रंप के दावों पर रूस की प्रतिक्रिया, भारत के साथ साझेदारी को बताया मजबूत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 15 अक्टूबर को दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मीडिया में हलचल मच गई। ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ भी लगाया था, ताकि वह रूस से तेल खरीदने से रोक सके।

हालांकि रूस और भारत ने इस मामले में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि भारत के कच्चे तेल के कुल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है। उन्होंने बताया कि रूस भारत के लिए हमेशा एक किफायती और भरोसेमंद विकल्प रहा है। अलीपोव ने कहा,

“रूस और भारत की रणनीतिक साझेदारी को दुनिया में स्थिरता लाने वाली ताकत के रूप में देखा जाता है। यह रिश्ता भरोसे की बुनियाद पर टिका है। हम भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे भरोसेमंद साझेदार भी।”

रूस ने इस मामले में ट्रंप को भी अप्रत्यक्ष संदेश दिया। अलीपोव ने कहा कि ग्लोबल नॉर्थ देशों की टैरिफ और प्रतिबंध भारत और रूस के बीच मजबूत रिश्तों को प्रभावित नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार जरूरी है, और इसे रोकने की कोशिशें असफल रहेंगी।

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के दावों पर प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,

“भारत तेल और गैस का महत्वपूर्ण आयातक है। अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी निरंतर प्राथमिकता रही है। भारत अपने लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेता है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयान में चुनावी और राजनीतिक संदेश भी छुपा हुआ था। पिछले वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर और कई प्रतिबंध लागू हुए हैं, और उसी तरह ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति में किसी भी बाहरी दबाव को प्राथमिकता नहीं देगा। देश अपने लोगों और अर्थव्यवस्था के हित में ही तेल और गैस से जुड़े फैसले लेता रहेगा।

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