“ब्लू लाइट का छुपा खतरा: आपकी नींद और आंखों के लिए जोखिम”
स्क्रीन टाइम सिर्फ थकावट नहीं, बल्कि आंखों और नींद पर असर डाल सकता है।
आजकल लोग दिन-रात मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की स्क्रीन के संपर्क में रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन डिवाइसेज की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट (Blue Light) आपकी नींद, आंखों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से आँखों में जलन, सूखापन और दर्द होने लगता है। इसके अलावा, यह मस्तिष्क में मेलाटोनिन नामक हार्मोन के स्तर को प्रभावित करता है, जो नींद को नियंत्रित करता है। इसका मतलब यह है कि देर रात तक स्क्रीन पर काम या मोबाइल चलाने से नींद पूरी नहीं होती और दिनभर थकान, ध्यान की कमी और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

एक हालिया रिसर्च में पाया गया है कि लगभग 70% युवा और ऑफिस कर्मचारी हर दिन 6 से 8 घंटे स्क्रीन के सामने बिताते हैं। लंबे समय तक लगातार ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से सिर दर्द, आंखों का थकना, चश्मे की जरूरत बढ़ना और माइग्रेन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। इसके साथ ही मानसिक तनाव और चिंता की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
इसके बचाव के लिए एक्सपर्ट्स ने कुछ आसान उपाय बताए हैं:
स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें और नाईट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करें।
हर 20 मिनट के काम के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें (20-20-20 नियम)।
सोने से कम से कम 1 घंटा पहले स्क्रीन का उपयोग बंद कर दें।
आंखों को रिलैक्स करने के लिए हल्की मसाज या ठंडी पट्टी का इस्तेमाल करें।
दिनभर पर्याप्त पानी पिएं ताकि आंखें सूखी न हों।
लंबे समय तक लगातार स्क्रीन के सामने न बैठें, बीच-बीच में टहलें।

निष्कर्ष:
ब्लू लाइट हमारी सेहत पर एक अनदेखा और छुपा खतरा है। छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर हम अपनी आंखों, नींद और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते हैं।

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संजना झा पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह हिंदी माइक में बतौर असिस्टेंट एडिटर कार्यरत हैं। उन्हें समसामयिक घटनाएँ, राजनीति एवं लाइफस्टाइल जैसे विषयों में गहरी समझ और लेखन का व्यापक अनुभव प्राप्त है। अपनी खोजपरक दृष्टि, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विषयों की गहराई तक पहुंचने की शैली के लिए वह जानी जाती हैं।
ज्वाइनिंग डेट: 16 अगस्त 2025

